अध्यात्म शब्द आत्म में अधि उपसर्ग लगा कर बना है. आत्मा को ऊपर उठाना या आत्मोन्नति ही इसका अर्थ है. जो व्यक्ति परमात्मा को सर्वत्र तथा प्रत्येक जीव में समान रूप से देखता है और यह समझता है कि इस नश्वर शरीर के भीतर न तो आत्मा, न ही परमात्मा कभी भी विनष्ट होता है वही वास्तव में आत्मोन्नति की चरम अवस्था को प्राप्त होता है. परमात्मा ही समस्त जीवों का आदि, मध्य तथा अन्त है. अत: अध्यात्म विद्या आत्मा और ईश्वर के सम्बन्ध को प्रकट करती है. Labels: अध्यात्म, आत्मा, ईश्वर, परमात्मा





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