सभी का अर्थ एक सत्ता ही है जैसे —
- आत्मा एव इदं सर्वम् (छान्दोग्य उपनिषद् 7-25-2) यह आत्मा ही सब कुछ है.
- सर्वं खलु इदं ब्रह्म (छान्दोग्य उपनिषद्) सब कुछ निश्चय ही यह ब्रह्म ही है.
- सदेव सौम्य इदम् अग्रे आसीत्, एकम् एवं अद्वितीयम् (छान्दोग्य 6-2-1) पहले सत् ही था, अकेला और अद्वितीय.
- अयम् आत्मा ब्रह्म (बृहदारण्यक उपनिषद् 2-5-19) यह आत्मा ही ब्रह्म है.
- एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति (ऋग्वेद)
Labels: आत्मा, उपनिषद्, छान्दोग्योपनिषद्, बृहदारण्यक, ब्रह्म
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