पुरुष और प्रकृति. यह दर्शन द्वैतवादी है. पुरुष चेतन है, यह नित्य है, अपरिवर्तनीय है. प्रकृति इस संसार का आदि कारण है. यह एक नित्य और जड़ वस्तु है किन्तु सदा परिवर्तनशील है. Labels: चेतन, तत्त्व, दर्शन, द्वैतवादी, पुरुष, प्रकृति, संसार, सांख्य





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