जब ब्रह्म कर्ता का भाव ग्रहण करता है जैसे सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता, संहारकर्ता आदि या जब ब्रह्म के साथ कोई विशेषण लगता है जैसे सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान् आदि तब वह सगुण ब्रह्म या ईश्वर कहलाता है. सगुण ब्रह्म भी निराकार ही रहता है. सगुण ब्रह्म या ईश्वर की ही उपासना की जा सकती है. Labels: ईश्वर, ब्रह्म, सगुण ब्रह्म





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