सभी धर्मग्रन्थ समाज के हित के लिए बने हैं, समाज धर्मग्रन्थ के हित के लिए नहीं बना. किसी भौगोलिक सीमा में बँधे समाज का हित ही राष्ट्रहित कहलाता है. Labels: धर्मग्रन्थ, भौगोलिक, राष्ट्रहित, समाज
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