पुराणों में ही लिखा है कि पहले वेद को तीन भागों – ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद में बाँटा गया जिसे वेदत्रयी कहा जाता था. वेद में भी प्राय: तीन वेद का संकेत किया गया है. वेद का विभाजन राम के जन्म के पूर्व पुरूरवा के समय में हो गया था. बाद में अथर्व वेद का संकलन ऋषि अथर्वा द्वारा किया गया. इस प्रकार वेद के संकलन में व्यास का कोई योगदान नहीं है. Labels: अथर्ववेद, ऋग्वेद, ऋषि, पुराण, पुरूरवा, यजुर्वेद, वेद, व्यास, सामवेद





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