संस्कृत में स्व: का अर्थ आत्मा होता है तथा ग का अर्थ होता है जाने वाला, ठहरने वाला या शेष रहने वाला. जब शरीर का अवसान होता है तो आत्मा आत्मलोक में ही वास करता है. इसलिए मरने पर किसी के लिए कहा जाता है कि उसका देहावसान या स्वर्गवास हो गया. यहॉं स्वर्ग का तात्पर्य आत्मा के ठहरने के लोक से है. स्थान न घेरने के कारण इसका भौतिक अस्तित्व नहीं है.





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