जहां तक श्रद्धालुओं का प्रश्न है वे समान श्रद्धा से विष्णु, शिव, दुर्गा, गणपति आदि के मन्दिरों में जाते हैं. केवल यह बताने की आवश्यकता है कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, रुद्र, गणपति, पशुपति, स्कन्द, सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा,पार्वती, काली आदि नाम एक ही परमेश्वर के नाम हैं. पुराण वेद के विरुद्ध जाकर एक ही परमात्मा के गुणवाचक नामों को भिन्न-भिन्न मूर्त रूप प्रदान करते हैं और वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करते हैं. पुराणों के स्थान पर वेदों का महत्व बढ़ा दो, विभिन्न सम्प्रदाय स्वत: ही मिट जायेंगे. Labels: गाणपत्य, परमात्मा, परमेश्वर, पुराण, वेद, वैष्णव, शाक्त, शैव, सम्प्रदाय





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