देश के प्रसिद्ध मन्दिरों में बैठ कर मूर्तियों के भोग अथवा नित्य विवाह में इतना समय लगा रहे हैं कि श्रद्धालु दर्शन करने के लिए लम्बी लाइन लगाने और अतिरिक्त धन खर्च करने के लिए बाध्य हो जायँ. वे गुरु जी बन कर मूर्ख शिष्यों को अपने नये सम्प्रदाय का सदस्य बना रहे हैं या कथावाचक के रूप में झूठ का प्रचार कर रहे हैं. Labels: कथावाचक, गुरु, झूठ, पाखण्ड, मन्दिर, मूर्ति पूजा, शिष्य, सम्प्रदाय





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