वि‍श्‍व धर्म क्‍या है ?

स्‍वस्‍थ आचरण, करुणा, दान, पवि‍त्रता, सादा जीवन, अहंकार का त्‍याग, सत्‍य-पालन, ईमान, सह-अस्‍ति‍त्‍व सभी धर्म सि‍खाते हैं. यही वि‍श्‍व धर्म है.

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क्‍या अध्‍यात्‍म और वि‍श्‍व प्रेम में नि‍कट सम्‍बन्‍ध है ?

ब्रह्म के वि‍राट रूप अर्थात् वि‍श्‍व से प्रेम करना ही अध्‍यात्‍म है.

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जाति‍यॉं कैसे उत्‍पन्‍न हुईं ?

श्रम-वि‍भाजन, श्रम के वि‍शेषीकरण और कुल-परम्‍परा को आगे बढ़ाने की ललक तथा स्‍थान वि‍शेष से पहचान कायम रखने की इच्‍छा ने वि‍श्‍व भर में जाति‍यों को जन्‍म दि‍या.

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भौति‍कवादी और अध्‍यात्‍मवादी में क्‍या अन्‍तर है ?

भौति‍कवादी की पहुँच ब्रह्म के शरीर या वि‍श्‍व के भौति‍क पदार्थों में नि‍हि‍त आनन्‍द तक सीमि‍त होती है. अध्‍यात्‍मवादी की पहुँच ब्रह्म के मन तक होती है और वह इन्‍द्रि‍य-वि‍षयों से भि‍न्‍न आनन्‍द प्राप्‍त कर लेता है.

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सम्‍पूर्ण वि‍श्‍व एक होने की प्रक्रि‍या में है. वि‍श्‍व में आध्‍यात्‍मि‍क एकता नि‍र्धारि‍त करने वाले तत्त्व क्‍या होंगे ?

एकेश्‍वरवाद, सत्‍य, सौमनस्‍य और सदाचरण.

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इन्‍द्रि‍यों के वि‍षयों से क्‍या तात्‍पर्य है ?

पांच ज्ञानेन्‍द्रि‍यों के पांच वि‍षय हैं —
ज्ञानेन्‍द्रि‍यां वि‍षय
आंख रूप
जीभ रस
नाक गन्‍ध
त्‍वचा स्‍पर्श
कान शब्‍द

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विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
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