वेद के पुरुष और ब्रह्म के विराट रूप में कोई अन्तर नहीं है. इस प्रकार वेद के अनुसार पुरुष एक है. सांख्य दर्शन के अनुसार प्रत्येक जीव के शरीर से संपर्कित एक-एक पुरुष है. इस प्रकार सांख्य के अनुसार पुरुष अनेक हैं. किन्तु वेद तथा सांख्य दोनों पुरुष को निरपेक्ष तथा नित्य मानते हैं. सम्भवत: भ्रम को दूर करने के लिए उपनिषदों में ब्रह्म शब्द का अधिक प्रयोग किया गया है.




