जो धर्मग्रन्थ किसी एक व्यक्ति के विचार के बजाय अनेक व्यक्तियों के विचारों का संकलन हो वह अधिक श्रेष्ठ होता है. वेद अनेक ऋषियों के विचारों को समाविष्ट करता है, इसलिए वेद श्रेष्ठ है. वैसे यह निजी विश्वास का विषय है. Labels: ऋषि, धर्मग्रन्थ, विचार, विश्वास, विषय, वेद, व्यक्ति, श्रेष्ठ, संकलन




