त्रि‍देव वास्‍तव में एक देव ही है, इसका प्रमाण दीजि‍ए.

सृष्‍टि‍स्‍थि‍त्‍यन्‍त करणीं ब्रह्मवि‍ष्‍णुशि‍वात्‍मि‍काम्.
स संज्ञां याति‍ भगवानेक एव जनार्दन:

(वि‍ष्‍णु पुराण 1-2-66)

वह एक ही भगवान् जनार्दन जगत् की सृष्‍टि‍, स्‍थि‍ति‍ और संहार के लि‍ए ब्रह्मा, वि‍ष्‍णु और शि‍व ‒ इन तीन संज्ञाओं को धारण करते हैं.

एको देव: सर्वभूतेषु गूढ़:
सर्वव्‍यापी सर्वभूतान्‍तरात्‍मा
कर्माध्‍यक्ष: सर्वभूताधि‍वास:
साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्‍च.

(श्‍वेताश्‍वतरोपनि‍षद्)

समस्‍त प्राणि‍यों में स्‍थि‍त एक देव है, वह सर्वव्‍यापक, समस्‍त भूतों का अन्‍तरात्‍मा, कर्मों का अधि‍ष्‍ठाता, समस्‍त प्राणि‍यों में बसा हुआ, सबका साक्षी, सबको चेतनत्‍व प्रदान करने वाला, शुद्ध और निर्गुण है.

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'ॐ नम: शिवाय' उत्तम मंत्र है, किन्तु शिवलिंग की पूजा क्यों की जाती है ?

'शिव' परमात्मा के कल्याणकारी स्वरूप का नाम है और 'लिंग' का अर्थ 'प्रतीक' होता है. जो मार्ग, नियम, व्यवहार, आचरण और विचार हमें नीचता से विरत कर उच्चता की ओर ले जायें वही कल्याणकर हो सकते हैं. ऊँचाई की ओर जाता गोल स्तम्भ समतावादी एवं कल्याणकर उच्च विचारों को प्रवाहित करने वाला है.

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वि‍ज्ञान और अध्‍यात्‍म मि‍ल जायें तो क्‍या होगा ?

वि‍ज्ञान का कार्य भौति‍क पदार्थों से वि‍श्‍व को जोड़ना है और अध्‍यात्‍म का कार्य मानसि‍क रूप से वि‍श्‍व को जोड़ना है. दोनों के मि‍लन से शि‍व अर्थात् कल्‍याण की उत्‍पत्‍ति‍ होगी.

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क्‍या गणेश ने व्‍यास के लि‍ए लेखक का काम कि‍या ?

वेद के अनुसार शि‍व या गणेश या गणपति‍ एक ही ईश्‍वर के नाम हैं. नि‍राकार ईश्‍वर कि‍सी व्‍यक्‍ति‍ का लेखक क्‍यों बनेगा.

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कि‍सी मांगलि‍क कार्य के प्रारम्‍भ करने पर ‘गणेशाय नम:’ क्‍यों कहा या लि‍खा जाता है ?

यजुर्वेद के अनुसार शि‍व ही गणपति‍ या गणेश हैं. मंगल की कामना से ऐसा कि‍या जाता है.

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शि‍व को कैलासपति‍ क्‍यों कहते हैं ?

संस्‍कृत में कै का अर्थ ध्‍वनि‍ करना तथा लास का अर्थ क्रीडा या लीला करना होता है. ईश्‍वर की लीला ध्‍वनि‍ प्रधान है. इसलि‍ए ध्‍वनि‍युक्‍त लीला का स्‍वामी होने से शि‍व को कैलासपति‍ कहा जाता है.

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विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
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