वेद के पुरुष तथा सांख्‍य दर्शन के पुरुष में क्‍या अन्‍तर है ?

वेद के पुरुष और ब्रह्म के वि‍राट रूप में कोई अन्‍तर नहीं है. इस प्रकार वेद के अनुसार पुरुष एक है. सांख्‍य दर्शन के अनुसार प्रत्‍येक जीव के शरीर से संपर्कित एक-एक पुरुष है. इस प्रकार सांख्‍य के अनुसार पुरुष अनेक हैं. कि‍न्‍तु वेद तथा सांख्‍य दोनों पुरुष को नि‍रपेक्ष तथा नि‍त्‍य मानते हैं. सम्‍भवत: भ्रम को दूर करने के लि‍ए उपनि‍षदों में ब्रह्म शब्‍द का अधि‍क प्रयोग कि‍या गया है.

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सांख्‍य दर्शन के दो प्रमुख तत्त्व क्‍या हैं ?

पुरुष और प्रकृति‍. यह दर्शन द्वैतवादी है. पुरुष चेतन है, यह नि‍त्‍य है, अपरि‍वर्तनीय है. प्रकृति‍ इस संसार का आदि‍ कारण है. यह एक नि‍त्‍य और जड़ वस्‍तु है कि‍न्‍तु सदा परि‍वर्तनशील है.

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आस्‍ति‍क दर्शन कि‍न्‍हें कहा जाता है ?

षड्दर्शन अर्थात् न्‍याय, वैशेषि‍क, सांख्‍य, योग, मीमांसा तथा वेदान्‍त आस्‍ति‍क दर्शन कहे जाते हैं.

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வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
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