Labels: समानमातृवत्परदारांश्च परद्रव्याणि लोष्ठवत्
आत्मवत्सर्वभूतानि य: पश्यति स पश्यति
परायी स्त्री को जो माता के समान, पराये धन को मिट्टी के ढेले के समान तथा सब प्राणियों को अपने समान देखता है, वास्तव में वही देखता है.
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