क्‍या पुराण भ्रम उत्‍पन्‍न करते हैं ?

अन्‍धवि‍श्‍वासी के मन में पुराण कोई भ्रम नहीं उत्‍पन्‍न करते, तर्कशील के मन में पुराण संशय या भ्रम उत्‍पन्‍न करते हैं कि‍न्‍तु ज्ञानी जन पुराणों से काम की बातें मक्‍खन की तरह नि‍काल लेते हैं.

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अन्‍धवि‍श्‍वास और पाखण्‍ड को कैसे समाप्‍त कि‍या जा सकता है ?

वैज्ञानि‍क दृष्‍टि‍ अपना कर झूठ और पाखण्‍ड को समाप्‍त कि‍या जा सकता है.

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तान्‍त्रि‍क और ओझा अपने कुकृत्‍य में क्‍यों सफल हो जाते हैं ?

लोगों की अज्ञानता, लोभ और अन्‍धवि‍श्‍वास के कारण.

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विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
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