कर्मकाण्ड अर्थात् यज्ञादि कर्मों के सम्पादन से जीवन के परम पुरुषार्थ अर्थात् अमरत्व की प्राप्ति नहीं हो सकती. मुण्डकोपनिषद् का कहना है कि ये कर्म क्षुद्र नौकाओं के समान हैं जिनके द्वारा भवसागर को पार नहीं किया जा सकता. Labels: अमरत्व, कर्मकाण्ड, जीवन, भवसागर, मुण्डकोपनिषद्, मोक्ष, यज्ञ




