आत्‍मरक्षण की प्रवृत्‍ति‍ सभी जीवों में होती है इसे वि‍ज्ञान मानता है. ऐसा होने का कारण क्‍या है ?

उपनि‍षदों का कहना है कि‍ जीवन इसलि‍ए इतना प्रि‍य है कि‍ यह आनन्‍दमय है. यदि‍ जीवन में आनन्‍द नहीं रहता तो इसे कौन चाहता.

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सभी सुखों का मूल स्रोत कौन है ?

ब्रह्म ही सभी सुखों का मूल स्रोत है. समस्‍त सांसारि‍क आनन्‍द उसी के क्षुद्र कण हैं. (बृहदारण्‍यक उपनि‍षद्)

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भौति‍कवादी और अध्‍यात्‍मवादी में क्‍या अन्‍तर है ?

भौति‍कवादी की पहुँच ब्रह्म के शरीर या वि‍श्‍व के भौति‍क पदार्थों में नि‍हि‍त आनन्‍द तक सीमि‍त होती है. अध्‍यात्‍मवादी की पहुँच ब्रह्म के मन तक होती है और वह इन्‍द्रि‍य-वि‍षयों से भि‍न्‍न आनन्‍द प्राप्‍त कर लेता है.

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अधि‍कतम सुख और आनन्‍द कैसे प्राप्‍त कि‍या जा सकता है ?

भोग और वैराग्‍य में सन्‍तुलन रख कर.

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युवजन के लि‍ए क्‍या संदेश है ?

वर्तमान का आनन्‍द लो और भवि‍ष्‍य के लि‍ए तैयारी करो.

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राम को रामचन्‍द्र क्‍यों कहा जाता है ?

राम का अर्थ आनन्‍द प्रदान करने वाला तथा चन्‍द्र का अर्थ आनन्‍दस्‍वरूप है. इस प्रकार रामचन्‍द्र परमेश्‍वर का बोध कराता है.

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विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
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