कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ on HINDUISM)
उपनिषदों का कहना है कि जीवन इसलिए इतना प्रिय है कि यह आनन्दमय है. यदि जीवन में आनन्द नहीं रहता तो इसे कौन चाहता.Labels: आनन्द, उपनिषद्, जीवन, विज्ञान
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ब्रह्म ही सभी सुखों का मूल स्रोत है. समस्त सांसारिक आनन्द उसी के क्षुद्र कण हैं. (बृहदारण्यक उपनिषद्)Labels: आनन्द, उपनिषद्, बृहदारण्यक, ब्रह्म, सांसारिक, सुख, स्रोत
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भौतिकवादी की पहुँच ब्रह्म के शरीर या विश्व के भौतिक पदार्थों में निहित आनन्द तक सीमित होती है. अध्यात्मवादी की पहुँच ब्रह्म के मन तक होती है और वह इन्द्रिय-विषयों से भिन्न आनन्द प्राप्त कर लेता है.Labels: अध्यात्मवादी, आनन्द, इन्द्रियाँ, ब्रह्म, भौतिकवादी, विश्व, विषय
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भोग और वैराग्य में सन्तुलन रख कर.Labels: आनन्द, भोग, वैराग्य, सुख
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वर्तमान का आनन्द लो और भविष्य के लिए तैयारी करो.Labels: आनन्द, भविष्य, संदेश
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राम का अर्थ आनन्द प्रदान करने वाला तथा चन्द्र का अर्थ आनन्दस्वरूप है. इस प्रकार रामचन्द्र परमेश्वर का बोध कराता है.Labels: आनन्द, चन्द्र, परमेश्वर, राम, रामचन्द्र
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Sahitya Sewa Sadan, Rae Bareli Open this Placemark
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