उपनिषदों में कर्म तथा पुनर्जन्म की अवधारणाओं को एक सिद्धान्त का रूप दिया गया है. कठोपनिषद् में इस विचार को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है कि मृतक की आत्मा नवीन शरीर धारण करती है. आत्मा अपने कर्म तथा ज्ञान के अनुसार जड़ वस्तुओं जैसे पेड़ या पौधों का स्वरूप भी ग्रहण कर सकती है. Labels: आत्मा, उपनिषद्, कठोपनिषद्, कर्म, ज्ञान, पुनर्जन्म




