संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म तथा क्रियमाण कर्म ये कर्म के तीन प्रकार हैं. पूर्व जन्म में किये गये कर्म संचित कर्म कहे जाते हैं. पूर्व जन्म के कर्मों में जिन कर्मों का फल इस जन्म में भोगना पड़ता है वे प्रारब्ध कर्म कहे जाते हैं. व्यक्ति द्वारा वर्तमान जीवन में किया जा रहा कर्म क्रियमाण कर्म कहलाता है.Labels: कर्म, क्रियमाण, जन्म, जीवन, प्रारब्ध, व्यक्ति