कर्म विकर्म का संयोग पाकर अकर्म में बदल जाता है अर्थात् निष्पाप मन से किया गया कार्य मनुष्य को कर्मफल भोग से नहीं बांधता. Labels: अकर्म, कर्म, कर्मफल, कार्य, निष्पाप, भोग, मन, मनुष्य, विकर्म
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