त्रि‍देव वास्‍तव में एक देव ही है, इसका प्रमाण दीजि‍ए.

सृष्‍टि‍स्‍थि‍त्‍यन्‍त करणीं ब्रह्मवि‍ष्‍णुशि‍वात्‍मि‍काम्.
स संज्ञां याति‍ भगवानेक एव जनार्दन:

(वि‍ष्‍णु पुराण 1-2-66)

वह एक ही भगवान् जनार्दन जगत् की सृष्‍टि‍, स्‍थि‍ति‍ और संहार के लि‍ए ब्रह्मा, वि‍ष्‍णु और शि‍व ‒ इन तीन संज्ञाओं को धारण करते हैं.

एको देव: सर्वभूतेषु गूढ़:
सर्वव्‍यापी सर्वभूतान्‍तरात्‍मा
कर्माध्‍यक्ष: सर्वभूताधि‍वास:
साक्षी चेता केवलो निर्गुणश्‍च.

(श्‍वेताश्‍वतरोपनि‍षद्)

समस्‍त प्राणि‍यों में स्‍थि‍त एक देव है, वह सर्वव्‍यापक, समस्‍त भूतों का अन्‍तरात्‍मा, कर्मों का अधि‍ष्‍ठाता, समस्‍त प्राणि‍यों में बसा हुआ, सबका साक्षी, सबको चेतनत्‍व प्रदान करने वाला, शुद्ध और निर्गुण है.

Labels: , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

क्‍या पुराण भ्रम उत्‍पन्‍न करते हैं ?

अन्‍धवि‍श्‍वासी के मन में पुराण कोई भ्रम नहीं उत्‍पन्‍न करते, तर्कशील के मन में पुराण संशय या भ्रम उत्‍पन्‍न करते हैं कि‍न्‍तु ज्ञानी जन पुराणों से काम की बातें मक्‍खन की तरह नि‍काल लेते हैं.

Labels: , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

शैव, वैष्‍णव, शाक्‍त और गाणपत्‍य सम्‍प्रदायों को एकता के सूत्र में कैसे बांधा जा सकता है ?

जहां तक श्रद्धालुओं का प्रश्‍न है वे समान श्रद्धा से वि‍ष्‍णु, शि‍व, दुर्गा, गणपति‍ आदि‍ के मन्‍दि‍रों में जाते हैं. केवल यह बताने की आवश्‍यकता है कि‍ ब्रह्मा, वि‍ष्‍णु, शि‍व, रुद्र, गणपति‍, पशुपति‍, स्‍कन्‍द, सरस्‍वती, लक्ष्‍मी, दुर्गा,पार्वती, काली आदि‍ नाम एक ही परमेश्‍वर के नाम हैं. पुराण वेद के वि‍रुद्ध जाकर एक ही परमात्‍मा के गुणवाचक नामों को भि‍न्‍न-भि‍न्‍न मूर्त रूप प्रदान करते हैं और वैवाहि‍क सम्‍बन्‍ध स्‍थापि‍त करते हैं. पुराणों के स्‍थान पर वेदों का महत्‍व बढ़ा दो, वि‍भि‍न्‍न सम्‍प्रदाय स्‍वत: ही मि‍ट जायेंगे.

Labels: , , , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

क्‍या व्‍यास ने वेद को चार भागों में बाँटा ?

पुराणों में ही लि‍खा है कि‍ पहले वेद को तीन भागों – ऋग्‍वेद, यजुर्वेद व सामवेद में बाँटा गया जि‍से वेदत्रयी कहा जाता था. वेद में भी प्राय: तीन वेद का संकेत कि‍या गया है. वेद का वि‍भाजन राम के जन्‍म के पूर्व पुरूरवा के समय में हो गया था. बाद में अथर्व वेद का संकलन ऋषि‍ अथर्वा द्वारा कि‍या गया. इस प्रकार वेद के संकलन में व्‍यास का कोई योगदान नहीं है.

Labels: , , , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 
 
 
विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
samaj الهندوسيه  Vishwa 世界印度教samaj vishwaヒンドゥー教samaj vishwa 힌두교 samaj Вишва хинду Самадж
    Vishwa Hindu Samaj    

Sahitya Sewa Sadan, Rae Bareli Open this Placemark

© 2007 vishwahindusamaj.com