सांख्‍य दर्शन के दो प्रमुख तत्त्व क्‍या हैं ?

पुरुष और प्रकृति‍. यह दर्शन द्वैतवादी है. पुरुष चेतन है, यह नि‍त्‍य है, अपरि‍वर्तनीय है. प्रकृति‍ इस संसार का आदि‍ कारण है. यह एक नि‍त्‍य और जड़ वस्‍तु है कि‍न्‍तु सदा परि‍वर्तनशील है.

Labels: , , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

धार्मि‍क पूजा-पद्धति‍ का उदय कैसे हुआ ?

अपने पूर्वजों या पि‍तरों की पूजा से अथवा प्राकृति‍क शक्‍ति‍यों जैसे सूर्य, चन्‍द्र, जल, वायु आदि‍ की पूजा से उनका मानवीकरण करके अथवा यथावत्.

Labels: , , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

गोपी संग रास लीला का क्‍या अर्थ है ?

वेद में वि‍ष्‍णु को संसार का रक्षक होने के कारण गोप कहा गया है. संस्‍कृत में गो का अर्थ तारे, आकाश, पृथ्‍वी, प्रकाश की कि‍रण, स्‍वर्ग, मवेशी, वाणी, सूर्य, चन्‍द्रमा, गाय आदि‍ होता है. इन सबका पालनकर्ता होने से परमेश्‍वर गोप, गोपाल, गोपेन्‍द्र आदि‍ कहाता है. ईश्‍वर की माया या प्रकृति‍ गोपी या गोपि‍का कहलाती है. जैसे माया से ईश्‍वर मायापति‍ कहलाता है वैसे ही माया के पर्यायवाची शब्‍द गोपी से वह गोपीनाथ कहलाता है. रास शब्‍द का संस्‍कृत भाषा में अर्थ होता है ध्‍वनि‍ तथा लीला का अर्थ क्रीडा करना होता है. अपनी माया या गोपी के साथ परमेश्‍वर आज भी ध्‍वनि‍मय क्रीडा कर रहा है. गो का अर्थ गाय भी होने से गोप ग्‍वाले को भी तथा गोपी उसकी पत्‍नी अर्थात् ग्‍वालि‍न को भी कहते हैं. देवकीनन्‍दन कृष्‍ण को वि‍ष्‍णु का अवतार मान लेने के बाद मायापति‍ की लीला को गलत अर्थ में ले लि‍या गया. वि‍ष्‍णु की रास लीला कृष्‍ण की काम क्रीड़ा बन गयी. मूलत: कृष्‍ण नाम वि‍ष्‍णु का पर्यायवाची है. इस प्रकार कृष्‍ण नाम की महि‍मा को पुराण न्‍यून करते हैं.

Labels: , , , , , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

मनु और शतरूपा का वास्‍तवि‍क अर्थ क्‍या है ?

मनु (मन्, उच्) का अर्थ है वि‍चार से परि‍पूर्ण और प्रारम्‍भ में यह सृष्‍टि‍ के लि‍ए मननशील परमात्‍मा का अर्थ रखता था. शतरूपा यह प्रकृति‍ है जो प्रति‍ पल सैकड़ों रूप धारण करती है.

Labels: , , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 

सभी धर्म क्‍या करते हैं ?

सभी धर्म भौति‍क जगत या प्रकृति‍ की सीमाओं के पार जाने का यत्‍न करते हैं.

Labels: , , ,

0 Comments   Links to this post

 
 
 
 
विश्‍व हिन्‍दू समाज વિશ્‍વ હિન્‍દૂ સમાજ বিশ্‍ব হিন্‍দূ সমাজ ਵਿਸ਼੍‍ਵ ਹਿਨ੍‍ਦੂ ਸਮਾਜ విశ్‍వ హిన్‍దూ సమాజ
வி்‍வ ஹிந்‍ ஸமாஜ വിശ്‍വ ഹിന്‍ദൂ സമാജ ଵିଶ୍‍ଵ ହିନ୍‍ଦୂ ସମାଜ ඵබඵ ඹඨඦෂ මථග ವಿಶ್‍ವ ಹಿನ್‍ದೂ ಸಮಾಜ
samaj الهندوسيه  Vishwa 世界印度教samaj vishwaヒンドゥー教samaj vishwa 힌두교 samaj Вишва хинду Самадж
    Vishwa Hindu Samaj    

Sahitya Sewa Sadan, Rae Bareli Open this Placemark

© 2007 vishwahindusamaj.com