सभी सुखों का मूल स्रोत कौन है ?

ब्रह्म ही सभी सुखों का मूल स्रोत है. समस्‍त सांसारि‍क आनन्‍द उसी के क्षुद्र कण हैं. (बृहदारण्‍यक उपनि‍षद्)

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आत्‍मा, ब्रह्म और सत् में क्‍या अन्‍तर है ? सप्रमाण बताइए.

सभी का अर्थ एक सत्‍ता ही है जैसे —
  1. आत्‍मा एव इदं सर्वम् (छान्‍दोग्‍य उपनि‍षद् 7-25-2) यह आत्‍मा ही सब कुछ है.
  2. सर्वं खलु इदं ब्रह्म (छान्‍दोग्‍य उपनि‍षद्) सब कुछ नि‍श्‍चय ही यह ब्रह्म ही है.
  3. सदेव सौम्‍य इदम् अग्रे आसीत्, एकम् एवं अद्वि‍तीयम् (छान्‍दोग्‍य 6-2-1) पहले सत् ही था, अकेला और अद्वि‍तीय.
  4. अयम् आत्‍मा ब्रह्म (बृहदारण्‍यक उपनि‍षद् 2-5-19) यह आत्‍मा ही ब्रह्म है.
  5. एकं सद् वि‍प्रा बहुधा वदन्‍ति‍ (ऋग्‍वेद)

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आत्‍मा कौन है ?

वह जो प्राणों में बुद्धि‍वृत्‍ति‍यों के भीतर रहने वाला वि‍ज्ञानमय ज्‍योति‍ स्‍वरूप पुरुष है वही आत्‍मा है.
(बृहदारण्‍यक उपनि‍षद्)

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